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लखनऊ. मैगी नूडल्स, एक ऐसा

by fgaUnq ifjokj la?kBu laLFkk

लखनऊ. मैगी नूडल्स, एक ऐसा ब्रांड जो किसी पहचान का मोहताज नहीं है। देश में मैगी का करीब 13 सौ करोड़ से ज्यादा का बिजनेस है। इस बिजनेस को सिर्फ एक रूटीन ऑर्डर ने तबाह कर दिया है। यह ऑर्डर फूड सेफ्टी एंड ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट के कमिश्नर बादल चटर्जी ने दिया था, जिसके बाद जांच में मैगी में हानिकारक केमिकल एमएसजी और सीसे की ज्यादा मात्रा पाई गई। अब दिल्ली, उत्तराखंड और केरल में मैगी पर बैन लग गया है और यूपी में भी बैन करने की तैयारी शुरू हो गई है। बादल चटर्जी इलाहाबाद में कमिश्नर के पद पर तैनात थे। सितंबर 2014 में उनको फूड सेफ्टी एंड ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट में कमिश्नर बनाया गया। बादल चटर्जी ने dainikbhaskar.com से बातचीत में बताया कि पद संभालते ही उन्होंने एक रूटीन आदेश दिया था। इसमें पहली बार खाद्य पदार्थों की जांच के साथ-साथ सीलबंद खाने के पैकेट्स की जांच का आदेश भी शामि‍ल था। इसके बाद बाराबंकी में मैगी का सैंपल लिया गया था। इसे गोरखपुर लैब भेजा गया था और सैंपल जांच में फेल हो गए थे। फिर कोलकाता लैब भेजा गया बादल चटर्जी ने बताया कि गोरखपुर लैब की जांच में मैगी में केमिकल एमएसजी होने की बात सामने आई। इसके विषय में पैकेट पर नहीं लिखा था। इसके बाद सैंपल को कोलकाता लैब भेजा गया। वहां जांच में लेड भी पाया गया। हालांकि, इसी बीच बादल चटर्जी तीन महीने पहले रिटायर हो गए, लेकिन उनकी मुहीम को बाराबंकी के फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर संजय सिंह ने आगे बढ़ाया। रूटीन आदेश पर लिया गया था सैंपल फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर संजय सिंह ने बताया कि अफसरों से सीलबंद खाने के पैकेट्स की जांच करने के आदेश आए थे। इसलिए मैगी के साथ-साथ चिप्स और दूसरे सामानों का भी जांच के लिए सैंपल लिया गया। जांच के बाद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। नेस्ले पर जिसपर लोग इतना विश्वास करते हैं, उसमें हानिकारक केमिकल होने की बात पर यकीन नहीं हुआ। एक बार लगा कि गलत रिपोर्ट बनकर आ गई है। इसलिए दोबारा कोलकाता लैब जांच के लिए भेजा। वहां भी मैगी में हानिकारक केमिकल मिले। फख्र नहीं है इस काम पर संजय कहते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भले ही मैगी बैन हो रही है, लेकिन यह उनका रूटीन का काम है। मैगी का सच सामने लाकर कोई बड़ा काम नहीं किया है। संजय बाराबंकी में 2013 में पोस्टेड हुए थे। देखा जाए तो यह उनकी अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री में पीएचडी की है। लखनऊ के ही क्रिश्चियन कॉलेज से केमिस्ट्री से एमएससी किया है। साल 1998 में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के रूप में अपना करियर शुरू किया था।

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