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हिंदूंआें, क्या इसी को

by हिन्दू परिवार संघटन संस्था

हिंदूंआें, क्या इसी को सर्वधर्मसमभाव कहा जाता है ? नरेंद्र मोदीजी ने इस्लामी गोल टोपी नहीं पहनी तो उन्हे सांप्रदायिक कहनेवाले ढोंगी धर्मनिरपेक्षतावादी इस विषय पर क्यों कुछ नही बोलते ? क्या धर्मनिरपेक्षता का कथित पालन केवल हिंदूंआें को ही करना चाहिए ? भारत में अल्पसंख्यक बहुसंख्यक हिंदूंआें की धार्मिक भावनाआें को आहत करते हैं । परंतु जहां वे बहुसंख्यक होते है, उन इस्लामी देशों में क्या कभी वे अल्पसंख्यकों की भावनाआें का सम्मान करते हैं ? – सम्पादक, हिन्दू जनजागृति समिति

मुंबई – जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर मुस्लिम संगठनों का मतभेद सामने आ गया है। ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के मुख्य इमाम उमर अहमद इल्यासी ने कहा है कि अगर पीएम उन्‍हें योगा डे पर बुलाते हैं, तो वे उसमें भी शामिल होंगे। इल्यासी के नेतृत्व में मुस्लिम धर्मगुरुओं के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। उधर, मुंबई के मुस्लिम संगठनों ने महाराष्ट्र सरकार के उस आदेश का विरोध किया है, जिसमें २१ जून को इंटरनेश्नल योगा डे पर स्कूल आना अनिवार्य किया गया है। इन संगठनों ने कहा कि है कि योग और सूर्य नमस्कार के दौरान सूरज के सामने झुकना पड़ता है और मुसलमान केवल अल्लाह के सामने झुकते हैं।
‘योगा डे पर स्कूल आना जरूरी न किया जाए’

मुंबई मुस्लिम संगठन बुधवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस से मुलाकात करने वाले हैं। सीएम से मुलाकात के दौरान संगठनों के प्रतिनिधि मांग करेंगे कि योगा सेशन को अनिवार्य न किया जाए। इस बारे में जमात-ए- इस्लामी हिंद के शिक्षा सचिव जहूर अहमद ने कहा, “हमारे धर्म में अल्लाह के अलावा किसी और के सामने झुकना गलत माना गया है और इस तरह के आदेश मुसलमानों पर थोपा जाना गलत है। योग में सूर्य नमस्कार होता है और इसका मतलब यह है कि आपको सूर्य के सामने झुकना होगा। योग को अनिवार्य बनाना सही नहीं है।” इस्लामिक स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन की मुंबई यूनिट के अध्यक्ष मोहम्मद सलमान ने कहा, “हमें कोई आपत्ति नहीं होती अगर वे कोई ऐसी गतिविधि आरंभ करते, जिससे स्टूडेंट्स को लाभ होता, लेकिन इस काम से तो आपसी सद्भाव को नुकसान पहुंचेगा।” मुस्लिम एमएलए वारिस पठान ने महाराष्ट्र सरकार के कदम को असंवैधानिक बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के फरमान जारी कर बीजेपी सरकार अपने हिंदू राष्ट्र वाले एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रही है। वहीं, महाराष्ट्र सरकार के एक अधिकारी ने इसे केवल व्यायाम बताया है।
यूएन ने घोषित किया

बता दें कि पिछले साल पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में मांग उठाए जाने के बाद यूएन ने २१ जून को इंटरनेशनल योगा डे के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

हिंदूंआें, क्या इसी को सर्वधर्मसमभाव कहा जाता है ? नरेंद्र मोदीजी ने इस्लामी गोल टोपी नहीं पहनी तो उन्हे सांप्रदायिक कहनेवाले ढोंगी धर्मनिरपेक्षतावादी इस विषय पर क्यों कुछ नही बोलते ? क्या धर्मनिरपेक्षता का कथित पालन केवल हिंदूंआें को ही करना चाहिए ? भारत में अल्पसंख्यक बहुसंख्यक हिंदूंआें की धार्मिक भावनाआें को आहत करते हैं । परंतु जहां वे बहुसंख्यक होते है, उन इस्लामी देशों में क्या कभी वे अल्पसंख्यकों की भावनाआें का सम्मान करते हैं ? – सम्पादक, हिन्दू जनजागृति समिति मुंबई – जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर मुस्लिम संगठनों का मतभेद सामने आ गया है। ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के मुख्य इमाम उमर अहमद इल्यासी ने कहा है कि अगर पीएम उन्‍हें योगा डे पर बुलाते हैं, तो वे उसमें भी शामिल होंगे। इल्यासी के नेतृत्व में मुस्लिम धर्मगुरुओं के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। उधर, मुंबई के मुस्लिम संगठनों ने महाराष्ट्र सरकार के उस आदेश का विरोध किया है, जिसमें २१ जून को इंटरनेश्नल योगा डे पर स्कूल आना अनिवार्य किया गया है। इन संगठनों ने कहा कि है कि योग और सूर्य नमस्कार के दौरान सूरज के सामने झुकना पड़ता है और मुसलमान केवल अल्लाह के सामने झुकते हैं। ‘योगा डे पर स्कूल आना जरूरी न किया जाए’ मुंबई मुस्लिम संगठन बुधवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस से मुलाकात करने वाले हैं। सीएम से मुलाकात के दौरान संगठनों के प्रतिनिधि मांग करेंगे कि योगा सेशन को अनिवार्य न किया जाए। इस बारे में जमात-ए- इस्लामी हिंद के शिक्षा सचिव जहूर अहमद ने कहा, “हमारे धर्म में अल्लाह के अलावा किसी और के सामने झुकना गलत माना गया है और इस तरह के आदेश मुसलमानों पर थोपा जाना गलत है। योग में सूर्य नमस्कार होता है और इसका मतलब यह है कि आपको सूर्य के सामने झुकना होगा। योग को अनिवार्य बनाना सही नहीं है।” इस्लामिक स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन की मुंबई यूनिट के अध्यक्ष मोहम्मद सलमान ने कहा, “हमें कोई आपत्ति नहीं होती अगर वे कोई ऐसी गतिविधि आरंभ करते, जिससे स्टूडेंट्स को लाभ होता, लेकिन इस काम से तो आपसी सद्भाव को नुकसान पहुंचेगा।” मुस्लिम एमएलए वारिस पठान ने महाराष्ट्र सरकार के कदम को असंवैधानिक बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के फरमान जारी कर बीजेपी सरकार अपने हिंदू राष्ट्र वाले एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रही है। वहीं, महाराष्ट्र सरकार के एक अधिकारी ने इसे केवल व्यायाम बताया है। यूएन ने घोषित किया बता दें कि पिछले साल पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में मांग उठाए जाने के बाद यूएन ने २१ जून को इंटरनेशनल योगा डे के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

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